Hindi poem, by Harivansh rai Bachchan. kavita jo dil chhoole.

This was forwarded to me by Aa’eedah,

I took this as opportunity to share with all the Hindi lovers of poem.

Foremost because the message in it is something that one requires in every walk of life.

It’s really plain and to the point which really speaks.

*-हरीवंशराय बच्चन*
*Lovely message :*

कुँए में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है,
तो भरकर बाहर आती है…

जीवन का भी यही गणित है,
जो झुकता है वह
प्राप्त करता है…

जीवन में किसी का भला करोगे,
तो लाभ होगा…
क्योंकि ‘ भला ‘ का उल्टा ‘ लाभ ‘ होता है ।

और

जीवन में किसी पर दया करोगे,
तो वो याद करेगा..
क्योंकि ‘दया’ का उल्टा ‘ याद ‘ होता है।

यहाँ सब कुछ बिकता है , दोस्तों रहना जरा संभाल के !!!
बेचने वाले हवा भी बेच देते है , गुब्बारों में डाल के !!!

सच बिकता है , झूठ बिकता है, बिकती है हर कहानी !!!
तीन लोक में फैला है , फिर भी बिकता है बोतल में पानी !!!

कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस दिन खिलोगे… टूट कर बिखर जाओगे ।
जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
जिस दिन तराशे गए… “महान ” बन जाओगे ।।

–हरिवंशराय बच्चन

प्रस्तुत है कुछ मन मायल और लुभित पंक्तिया जो खास है मेरे समछ। एक बार अघ्यन्न निश्चित करे ,मन पृशन्न ज़रूर हो गा।

Would surely try to post the english translation , God willing. Ps.

my hindi typing is really bad I primarily use swift keys which don’t have hindi fonts while google has but I really like swift keyboard.you know.

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43 thoughts on “Hindi poem, by Harivansh rai Bachchan. kavita jo dil chhoole.

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